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दुर्भाग्य और परिहार

कुछ लोगों के जीवन में शादी के बाद उथल पुथल शुरू हो जाती है | यदि शादी के बाद आप कुछ अच्छा अनुभव नहीं कर रहे हैं या भाग्य साथ नहीं दे रहा है तो जन्मकुंडली में इसके कारण का पता लगा कर इसका परिहार किया जा सकता है |

यदि शुक्र पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो शादी के बाद भाग्य चमकने की बजाये दुर्भाग्य में भी बदल सकता है | ऐसी स्थिति में यह जानना आवश्यक है कि वह कौन सा ग्रह है जो शुक्र पर बुरा प्रभाव डाल रहा है | मैं एक एक करके सभी ग्रहों का वर्णन करता हूँ |

चन्द्र, बुध और गुरु से शुक्र को उतनी हानि नहीं होती इसलिए केवल उन्ही ग्रहों की चर्चा करूंगा जो शुक्र या विवाह के लिए बाधक बन सकते हैं |

इनमे सबसे ऊपर नाम आता है राहू का | राहू यदि भाग्य में अवरोध पैदा कर रहा हो तो बहुत ही चमत्कारी उपाय है | धर्म स्थान मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा आदि में जो थोड़ी बहुत गन्दी जगह दिखे वहां पर राहू का वास होता है | उस जगह पर झाड़ू लगाने से आप राहू को धर्म के स्थान से अलग कर सकते हैं | रोज न हो सके तो प्रत्येक शनिवार को यह उपाय करें | इसके अतिरिक्त किसी से स्टील का कोई बर्तन मुफ्त में न लें | यदि पहले लिया हो तो किसी तरह उसे वापस कर दें या उसकी कीमत दे दें |

शनि से शुक्र को उतना नुक्सान नहीं पहुँचता जितना सूर्य, मंगल और राहू से होता है | यदि शनि भाग्य में अवरोध का कारण हो तो किसी बुजुर्ग को कपडे भेंट करें | मंदिर / धर्मस्थान में पेठा दान करें | इसके अतिरिक्त एक और आजमाया हुआ उपाय है जो बहुत लाभदायक सिद्ध होता है | शुक्रवार के दिन स्टील का नया ताला खरीद लें और शनिवार की सुबह पांच बजे से पहले किसी धर्म स्थान में दान कर दें | ताले को बंद करके चाबी बीच में ही छोड़ दें और आते हुए पीछे मुड़कर न देखें |

मंगल यदि भाग्य में अवरोध पैदा कर रहा हो तो मंगलवार के दिन तंदूरी रोटी और खीर के साथ कद्दू की सब्जी का भोजन और कुछ पैसे किसी विकलांग व्यक्ति को दोपहर के समय दें | हर मंगलवार यह उपाय करें |

यदि सूर्य भाग्य में बाधक बन जाए तो आलस्य छोड़ दीजिये और सूर्योदय से पूर्व उठाना प्रारम्भ कर दीजिये | स्नानोपरांत ताम्बे के पात्र में जल भरकर थोडा दूध और केसर मिला कर यह जल सूर्यदेव को तब अर्पण कीजिये जब सूर्य उदय हो  रहा हो | केवल चालीस दिन में भाग्य में आ रहा अवरोध समाप्त हो जाएगा |